Saturday, July 21, 2018

सिकंदर के बारे में जानिए रोचक बात


सिकन्दर महान


आज हम आपको एक ऐसे विश्वविजेता के जीवन के बारे में 8 सच्चाईयां बताएंगे जो आपकी नज़र में इसके महान होने के भ्रम को तोड़ देगीं।

1.वह राजा बनने के लिए अपने भाइयों को मार दिया था
सिकंदर का जन्म 356 ईसवी पूर्व में ग्रीक(यूनान) के मकदूनिया(मेसोडोनिया) में हुआ था। उसका पिता फिलिप मकदूनिया का राजा था जिसने कई शादियां की थी।   
336 ईसवी पूर्व में सिकंदर जब 19-20 साल का था तो उसके पिता फिलिप की हत्या कर दी गई। ऐसी भी कहा जाता है कि सिकंदर की मां ओलंपिया ने ही जह़र देकर अपने पति की हत्या करवाई थी।
अपने पिता की मृत्यु के पश्चात सिकंदर ने राजगद्दी पाने के लिए अपने सौतेले और चचेरे भाईयों का कत्ल कर दिया और मकदूनिया का राजा बन गया।
2. विश्वविजेता बनने का सपना उसे अरस्तू ने दिखाया था
सिकंदर का गूरू अरस्तू था जो एक बहुत ही प्रसिद्ध और महान दार्शनिक था। अरस्तू के महत्व का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज पूरी दुनिया में जहां – जहां भी दर्शनशास्त्र, गणित, विज्ञान और मनोविज्ञान पढ़ाया जाता है उसमें कहीं ना कहीं अरस्तू के विचारों जा वैज्ञानिक अनुभवों का उल्लेख जरूर होता है।
सिकंदर जैसे प्रतिभाशाली व्यक्ति को निखारने का काम अरस्तू ने ही किया। कई इतिहासकार मानते हैं कि वह अरस्तू ही था जिसने सिकंदर के मन में पूरी दुनिया जीतने का सपना जगाया।

इस बात का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिकंदर के विजयी अभियान के दौरान अरस्तू का भतीजा कलास्थनीज़ भी एक सेनापति के रूप में उसके साथ गया था।
3. सिकंदर का युद्ध कौशल
कोई राजा ऐसे ही महान नहीं बनता उसके अपनी योग्यता को निखारना होता है। यह सिकंदर की योग्यता का ही परिणाम था कि उसकी छोटी सी सेना बड़ी – बड़ी सेनाओ को मात दे दिया करती थी। सिकंदर की युद्ध रणनीतियों को आज भी युरोप की किताबों में पढ़ाया जाता है।

सिकंदर के पत्थर और आग के गोले फेंकने वाले गुलेलनुमा बड़े- बड़े हथियार और उसके सैनिकों की लंबी – लंबी ढ़ालें युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाती थी।

कई ऐसे मौकों पर जब सिकंदर की सेना युद्ध में कमज़ोर पड़ती दिखती तो सिकंदर खुद आगे होकर लड़ता जिससे उसकी सेना का मनोबल बढ़ जाता।
4. विश्वविजेता बनने की शुरुआत
सिकंदर ने सबसे पहले मकदूनिया के आसपास के राज्यों को जीतना शुरू किया। मकदूनिया के आसपास के राज्यों को जीतने के बाद उसने एशिया माइनर (आधुनिक तुर्की) की तरफ कूच किया।

तुर्की के बाद एक – दो छोटे राज्यों को छोड़कर विशाल फ़ारसी साम्राज्य था। फ़ारसी साम्राज्य मिस्त्र, ईरान से लेकर पश्चिमोत्तर भारत तक फैला था। उल्लेखनीय है कि फारस साम्राज्य सिकंदर के अपने साम्राज्य से कोई 40 गुणा ज्यादा बड़ा था।

फारसी साम्राज्य का राजा शाह दारा था जिसे सिकंदर ने अलग- अलग तीन युद्धों में हराकर उसके साम्राज्य को जीता। परंतु शाह दारा ने सिकंदर से संधि कर ली और अपनी एक पुत्री ऱुखसाना का विवाह उससे कर दिया।

फ़ारसी साम्राज्य जीतने में सिकंदर को करीब 10 साल लग गए। विजय के पश्चात उसने बहुत भव्य जुलूस निकाला और अपने आपको विश्व विजेता कहलाना शुरू कर दिया क्योंकि फ़ारस को जीतकर वह उस तमाम भूमि के 60 प्रतीशत हिस्से को जीत चुका था जिसकी जानकारी प्राचीन ग्रीक के लोगों की थी।

भारत तक पहुँचते – पहुँचते उसे शाह दारा के इलावा छोटे – छोटे राज्यों, सूबेदारों और कबीलों से भी युद्ध करना पड़ा जिसमें उसकी जीत हुई।
5. सिकंदर का भारत पर हमला
शायद सिकन्दर इतिहास का पहला राजा था जिसने पूरी दूनिया को जीतने का सपना देखा। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए वह ग्रीस से मिस्त्र, सीरिया, बैक्ट्रिया, ईरान, अफगानिस्तान और वर्तमान पाकिस्तान को जीतता हुआ भारत पहुंचा था।
सिकंदर ने भारत पर 326 ईसा पूर्व में हमला किया था। उस समय भारत छोटे – छोटे राज्यों और गणराज्यों में बंटा हुआ था। राज्यों में राजा शासन करते थे और गणराज्यों के मुखी गणपति होते थे जो प्रजा की इच्छा अनुसार ही फैसले लेते थे।
भारत में सिकंदर का सामना सबसे पहले तक्षशिला के राजकुमार अंभी से हुआ था। अंभी ने शीघ्र ही आत्मसमर्पण कर दिया और सिकंदर को सहायता दी।

सिकंदर अंभी द्वारा भेंट की गई दौलत को देखकर देख दंग रह गया। वह सोच में पड़ गया कि अगर भारत के एक छोटे से राज्य के पास इतनी धन – संपदा है तो पूरे भारत में कितनी होगी ? भारत की धन – संपदा देखकर उसे भारत जीतने की इच्छा ओर बढ़ गई।

इधर तक्षशिला विश्वविद्यालय के एक आचार्य चाणक्य से भारत पर किसी विदेशी का हमला देखा ना गया। चाणक्य ने भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए सभी राजाओं से सिकंदर के विरूद्ध लड़ने का आग्रह किया, परंतू सभी राजा अपनी आपसी दुश्मनी की वजह से एक साथ ना आए।

चाणक्य ने सबसे शक्तिशाली राज्य मगध के राजा धनानंद से भी गुहार लगाई, परंतू उसने चाणक्य का अपमान कर महल से निकाल दिया।

इसके बाद चाणक्य ने गणराज्यों से एक होने की अपील की जिसमें वह काफी सफल रहे, इन गणराज्यों ने वापसी के समय सिकंदर को बहुत नुकसान पहुँचाया।
6. हाइडेस्पेस का युद्ध
सिकंदर का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध झेलम नदी के तट पर राजा पुरू या पोरस से हुआ। इस युद्ध को ‘पितस्ता का युद्ध‘ या ‘हाइडेस्पेस का युद्ध‘ कहा जाता है।

महाराजा पुरू सिंध -पंजाब सहित एक बहुत बड़े भू – भाग के स्वामी थे और अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध थे।

सिकंदर की सेना को झेहलम नदी पार करके पोरस से युद्ध करना था परंतु वर्षा के मौसम के कारण नदी में बाढ़ आई हुई थी और नदी को पार करना मुश्किल था।

पर रात में किसी तरह यवन सेना नदी के पार पहुँच गई। नदी के उस पार राजा पुरू भी 30,00 पैदल सैनिकों, 4,000 घोड़सवारों, 300 रथों और 200 हाथियों के साथ सिकंदर के स्वागत के लिए तैयार खड़े थे।

सिकंदर ने महाराज पोरस के पास एक संदेश भिजवाया जिसमें पोरस को अधीनता स्वीकार करने को कहा पर पोरस ने ऐसा नहीं किया।

इसके बाद दोनो सेनाओं में भयंकर युद्ध शुरू हुआ। युद्ध के पहले ही दिन सिकंदर की सेना को जमकर टक्कर मिली। इस युद्ध के बाद सिकंदर की सेना का मनोबल टूट गया। सिकंदर ने भी अनुभव किया कि वो पोरस को हरा नहीं सकेगा और लड़ाई जारी रख के अपना ही नुकसान कर लेगा। अंतः उसने पोरस को युद्ध रोकने का प्रस्ताव भेजा जिसे पोरस ने मान लिया।

दोनों पक्षों में संधि हुई जिसके अनुसार पोरस सिकंदर को आगे आने वाले युद्ध अभियानों में सहायता करेगा और बदले में जीते हुए राज्यों पर पोरस शासन करेगा।
7.सिकंदर के सैनिकों का व्यास नदी पार करने से इनकार करना
पोरस से युद्ध के बाद सिकंदर की सेना छोटे हिंदु गणराज्यों से भिड़ी। इसमें कठ गणराज्य के साथ हुई लड़ाई काफी बड़ी थी। कठ जाति के लोग जिन्हें कथेयोई या कथा जाति भी कहा गया है, अपने साहस के लिए सर्वप्रसिद्ध थी। कठों ने एक बार तो यवनों के छक्के छुड़ा दिए थे, लेकिन कम संख्या के कारण उन्होंने हार का मुंह देखना पड़ा।

कठों से युद्ध लड़कर यवन सेना व्यास नदी तक पहुंच ही पाई थी कि उसने आने बढ़ने से मना कर दिया। उन्होंने सुन रखा था कि व्यास नदी के पार नंदवंशी राजा के पास 20 हज़ार घुड़सवार सैनिक, 2 लाख पैदल सैनिक, 2 हज़ार चार घोड़े वाले रथ और लगभग 6 हज़ार हाथी थे। इतनी विशाल सेना के बारे में सुनकर वह घबरा गए। पंजाब में उन्हें जिस विरोध का सामना करना पड़ा उससे उन्हें ज्ञात हो गया होगा कि भविष्य में उन्हें किस प्रकार के युद्ध लड़ने होंगे। पंजाब के छोटे-छोटे गणतन्त्रीय राज्यों की सेनाएँ भी इतने उत्साह से लड़ीं कि सिकंदर की सेना को अहसास हो गया था कि नंदों से टक्कर होने पर उनका क्या हाल होगा।

सिकंदर सारे भारत पर ही विजय पाना चाहता था लेकिन उसे अपने सैनिकों की मर्जी के कारण व्यास नदी से ही वापस लौट जाना पड़ा। वापिस जाते हुए उसे मालव और क्षुद्रक आदि कई वीर हिंदु गणराज्यों से संगठित विरोध का सामना करना पड़ा क्योंकि सिकंदर की योजना जाते – जाते इनके क्षेत्रों को जीतने की थी।

माना जाता है कि इन सभी गणराज्यों को एक साथ लाने में आचार्य चाणक्य का बहुत बड़ा योगदान था। इन सभी गणराज्यों ने सिकंदर को काफी क्षति पहुँचाई और उसकी सेना के हौसले पस्त कर दिए।
8. सिकंदर की मृत्यु
जब सिकंदर की सेना ने व्यास नदी पार करने से इंकार कर देने से उसके उसके विश्व विजय का सपना टूट गया।वह अत्याधिक शराब पीने लगा और उदास रहने लगा।

सिकंदर भारत में लगभग 19 महीने रहा। जब वह बेबीलोन (ईरान) पहुँचा तो 323 ईसवी पूर्व में 33 साल की उम्र में उसकी मौत हो गई। उसकी मौत का कारण मलेरिया बताया जाता है।

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि सिकंदर की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई जबकि अन्य का मानना है कि उसकी जश्न के दौरान गुप्त तरीके से हत्या कर दी गई थी। शेप गत 10 वर्षों से जहरीले सबूत के बारे में अनुसंधान कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आर्सेनिक और स्ट्रिकनीन के जहर के सिद्धांत हास्यास्पद हैं। अध्ययन के नतीजे ‘क्लिनिकल टॉक्सिकोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। 

सिकंदर बोला कि 'मेरी पहली इच्छा है कि मेरा इलाज करने वाला हकीम ही मेरे ताबूत को खींचकर कब्र तक ले जाएगा।' 'दूसरी ये कि जब मेरा ताबूत कब्र तक ले जाया जाए तो उस रास्ते में मेरे इकट्ठे किए हुए खजाने में से सोने-चांदी बहुमूल्य पत्थर बिखेरे जाएं' और मेरी तीसरी और आखिरी इच्छा है कि 'मेरे दोनों हाथ ताबूत में से बाहर दिखाई देने चाहिए
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Thursday, July 19, 2018

भारतीय इतिहास के प्रमुख युद्ध

        EKLAVYA CAMPUS

STATIC GK 3

  भारतीय इतिहास के प्रमुख युद्ध

1. हाईडेस्पीज का युद्ध या ,झेलम का युद्ध या बितास्ता का युद्ध

326 ईसा पूर्व

किसके बीच : सिकंदर और पंजाब के राजा पोरस

विजय: सिकंदर

2. कलिंग का युद्ध

261 ईसा पूर्व

किसके बीच : सम्राट अशोक और कलिंग के राजा

विजय: अशोक

3. तराईन का प्रथम युद्ध

1191 ई

किसके बीच :मोहम्मद गौरी और पृथ्वी राज चौहान

विजय: पृथ्वीराज चौहान

(मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान से 17 बार युद्ध लड़ा जिसमें उसे 16 बार हार का सामना करना पड़ा। 17वीं बार भी वह पृथ्वीराज चौहान को नहीं हरा पाता अगर उसके ससुर राजा जयचंद मोहम्मद गौरी का साथ ना दिया होता। पृथ्वीराज चौहान ने राजा जयचंद के खिलाफ जाकर उनकी बेटी संयोगिता को भगाकर उनसे शादी किया था)

4. तराईन का दूसरा युद्ध

1192 ईस्वी

किसके बीच : मोहम्मद गौरी और पृथ्वी राज चौहान
विजेता : मोहम्मद गौरी

5. पानीपत का प्रथम युद्ध

1526 ई

किसके बीच : मुग़ल शासक बाबर और इब्राहीम लोधी
विजेता : बाबर

6. खानवा का युद्ध

1527 ई

किसके बीच : बाबर और राणा सांगा
विजेता : बाबर

7. चंदेरी का युद्ध

1528 ई

किसके बीच : बाबर और मदनी राय
विजेता : बाबर

8. घाघरा का युद्ध

1529 ई

किसके बीच : बाबर ने महमूद लोदी के नेतृत्व में अफगानों से
विजेता : बाबर

9. चौसा का युद्ध

1539 ईस्वी

किसके बीच : शेरशाह सूरी और हुमायु
विजेता : शेरशाह सूरी

10. कन्नौज (बिलग्राम का युद्ध)

1540 ईस्वी में

किसके बीच : शेरशाह सूरी और हुमायु
विजेता : शेरशाह सूरी

11. पानीपत का द्वितीय युद्ध
1556 ई
किसके बीच : अकबर और हेमू
विजेता : अकबर

12. तालीकोटा का युद्ध

1565 ई

किसके बीच : दक्कन की सल्तनतों (बीजापुर, बीदर, अहमदनगर व गोलकुंडा की संगठित सेना) vs विजयनगर साम्राज्य
विजेता :  दक्कन की सल्तनतों

13. हल्दी घाटी का युद्ध

1576 ई

किसके बीच : अकबर और महाराणा प्रताप
विजेता : अकबर

14. प्लासी का युद्ध

1757 ई

किसके बीच : अंग्रेजो और सिराजुद्दौला, (मीरजाफर)

विजेता : अंग्रेजो (रोबर्ट क्लाव)

15. बेदारा की लड़ाई

1759 ई

किसके बीच: अंग्रेज़ों और डचों के बीच

विजेता : अंग्रेजो (रोबर्ट क्लाव)

(डचों ने मीर जाफर के साथ मिलकर अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध लड़ा जिसमें ड्चों की बुरी तरह हार हुई)

15. वांडीवाश का युद्ध

1760 ई

किस के बीच : अंग्रेजो और फ्रांसीसियो
विजेता :  अंग्रेज

16. बक्सर का युद्ध

1764 ई

किसके बीच :  अंग्रेजों (हेक्टर मुनरो) और मुगल (मीर कासिम, अवध के नवाब  शुजाद्दौला एवं मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के बीच)
विजेता : अंग्रेज

17. प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध

1767-69 ई

किसके बीच : हैदर अली और अंग्रेजो
विजेता : हैदर अली

(मद्रास की संधि 1769 ईस्वी में)

19. द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध

1780-84 ई

किसके बीच : हैदर अली और अंग्रेजो(वारेन हेस्टिंग)
विजेता : अंग्रेज

(मंगलूर की संधि 1784 ईस्वी)

20. तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध

1790-92 ई

किसके बीच : टीपू सुल्तान और अंग्रेजो(लॉर्ड कार्नवालिस)
विजेता : अंग्रेज

(श्रीरंगपट्टनम की संधि 1792 ई)

21. चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध

1799 ई

किसके बीच: टीपू सुल्तान और अंग्रेजो(लॉर्ड मॉर्निंग्टन,बाद में लॉर्ड वेलेज़ली)

विजेता : अंग्रेज

22. प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध

1845-1846 ई

किसके बीच: अंग्रेजों (लॉर्ड हार्डिंग)

विजय: अंग्रेज

(लाहौर की संधि 1846 ईसवी)

23. द्वितीय आंग्ल सिख युद्ध

1848-49 ई

किसके बीच: अंग्रेजों (लॉर्ड डलहौजी )और सिक्खों के बीच

विजय: अंग्रेज

(लॉर्ड डलहौजी के द्वारा संपूर्ण पंजाब का विलय अंग्रेजी राज में कर लिया गया और सिख राज्य का प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा महारानी विक्टोरिया को भेज दिया)

24.भारत-चीन युद्ध

1962 ई

कारण: हिमालय सीमा विवाद,

चीन में 1959 के तिब्बती विद्रोह के बाद जब भारत ने दलाई लामा को शरण दी तो भारत चीन सीमा पर हिंसक घटनाओं की एक श्रृंखला शुरू हो गयी।

विजय: चीनी सेना की जीत

(अक्साई चिन चीन के नियंत्रण में आ गया)

25.भारत पाक युद्ध-1965

कारण: 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध की हार से भारत अभी उबर रहा था और पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को कमजोर मानते हुए अपनी शक्ति को ज्यादा आंका। पाकिस्तान ने समझा कि शास्त्री युद्ध को झेलने में असमर्थ होंगे और भारत अशक्त है और सामना नहीं कर सकेगा। उसने सोचा कश्मीरी आवाम भारत से आजादी चाहता है, अगर ऐसे में पाकिस्तान उनकी मदद करेगा तो कश्मीर को पाकिस्तान में आने से कोई नहीं रोक सकता।

विजय: भारत

ताशकंद समझौता: 11 जनवरी 1966

(यह समझौता ताशकंद, रूस में भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री तथा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अयूब ख़ाँ के बीच हुआ)

26. भारत पाक युद्ध-1971

कारण: पूर्वी पाकिस्तान पश्चिमी पाकिस्तान के खिलाफ विरोध जिसका समर्थन भारत ने किया।

विजेता : भारत

(जनरल एके नियाजी ने हार स्वीकार करते हुए अपने 93 हजार सैनिकों के साथ भारतीय सेना के कमांडर ले. जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण किया था. भारत की तरफ से जनरल सैम मानेकशॉ उस समय सेना प्रमुख थे. इस जंग के बाद विश्व मानचित्र पर नये देश ने रुप लिया, जिसे आज हम बांग्लादेश के नाम से जानते हैं।)

शिमला समझौता: 3 जुलाई 1972 को भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शिमला में एक संधि पर हस्ताक्षर हुए, जिसे शिमला समझौता कहा जाता है। इसमें भारत की तरफ से इंदिरा गांधी और पाकिस्तान की तरफ से जुल्फिकार अली भुट्टो शामिल थे।

इसमें यह प्रावधान किया गया कि दोनों देश अपने संघर्ष और विवाद समाप्त करने का प्रयास करेंगे, और यह वचन दिया गया कि उप-महाद्वीप में स्थाई मित्रता के लिए कार्य किया जाएगा।)

27. कारगिल युद्ध

(8 मई-14 जुलाई)1999
स्थान: कारगिल ज़िला, जम्मू-कश्मीर

कारण: वास्तव में कारगिल युद्ध कश्मीर हथियाने और भारत को अस्थिर करने के जिहादियों के 20 वर्ष से जारी अभियान का एक महत्वपूर्ण बिंदु है और यह अनेक मामलों में पहले की दोनों लड़ाइयों से भिन्न है।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेना प्रमुख जहांगीर करामात के बीच 1998 के करीब, मतभेद बढ गये थे। करामात की सेवानिवृत्ति के पश्चात किसे सेना प्रमुख बनाया जाय इस बात पर भी बहस चल रही थी। नवाज़ शरीफ ने एक आम सभा में अपने ऊपर टीका-टिप्पणी की इस बात से गुस्सा होकर करामात ने सेना प्रमुख पद से इस्तिफा दे दिया। नवाज शरीफ ने जनरल परवेज़ मुशर्रफ को सेना प्रमुख के पद पर नियुक्त किया। कश्मीर के कारगिल क्षेत्र में नियंत्रण रेखा के जरिये घुसपैठ करने की साजिश के पीछे तत्कालीन पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख परवेज मुशर्रफ को जिम्मेदार माना जाता है.

विजय: भारत

कारगिल विजय दिवस -26 जुलाई

Thursday, July 12, 2018

Khelo india essay in English


                Khelo India school games


   Introduction:
         
Khelo India school games (KISG) are the national level multidisciplinary grassroot games in India for under 17 years school kids to participate across 16 disciplines, which was launched by Prime Minister Narendra Modi on 31st January 2018 at Indira Gandhi Arena, New Delhi. The objective of KISG is to identify the Talent at grassroot level and revive the sports Culture by building a strong Framework for all sports played in our country.
 
   Nodal ministry:
The KISG works under the ministry of youth affairs and sports.

   
   Body part with advantages:
 
To accomplish the above objective KISG has been divided into 12 verticles such as physical fitness of school children, formation of state level khelo India centres, encouraging the development of women sport, annual sports organisation, topnotch infrastructure and promotion of rural and tribal games. Every year best thousand kids will be given an annual scholarship of rupees 5 lakh for 8 years.

   Challenges:


Some challenges comes in the way of KISG  i.e less popularity of a sports like Judo, Kho-Kho,  swimming etc, less number of broadcaster and problem of sponsorship.

     
    Suggestions:


According to new research only 3 games are viewed more in India that is cricket 85%
tennis 44% and football 41% but we should try to promote each and every game and encourage every sports related activity show that a sports person can perform efficiently.



     Conclusion:

Sports inculcate Team Spirit, develop strategic and analytical thinking, leadership skills, goal settings and risk taking therefore KISG helps in overall development of our nation and in this way it will transform India into a global Sporting powerhouse in the upcoming years and prove to be a game changer that Indian Sports has been looking for.

Thanku for visiting my blog.

Informal letter writing in Hindi

                                       अनौपचारिक पत्र (informal Letter)



आपका नाम सुमित है और आप पटना महेंद्रू के निवासी हैं, अपने मित्र रमेश को SSC CGL की परीक्षा में अंतिम रूप से चयन होने पर एक बधाई पत्र लिखिए।




सुमित
महेंद्रू ,पटना
बिहार

22 जून, 2018

प्रिय मित्र रमेश,
प्रेम!
कल तुम्हारा पत्र मिला उसे पढ़कर मैं काफी प्रसन्न हुआ कि तुम्हारा ssc cgl  में अंतिम रूप से चयन हो गया। मुझे तुमसे यही आशा थी। तुम्हारी पढ़ाई के प्रति निष्ठा और लगन को देखकर मुझे पूर्ण विश्वास हो गया था कि कि जल्द हीं तुम इसमें सफलता पाओगे ।आखिरकार तुम्हारे परिश्रम का उचित फल तुम्हें मिल ही गया। इस सफलता से तुम्हारे घरवाले बहुत ही खुश होंगे। और अपनी इच्छा के अनुसार जॉब पाकर तुम भी बहुत प्रसन्न होंगे।
                                इस शानदार सफलता पर मेरी तरफ से हार्दिक बधाई मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगा कि जीवन में इसी तरह से सफलता तुम्हारे कदम चूमती रहे। और इसी प्रकार उन्नति के पथ पर अग्रसर रहो। माता-पिता को मेरी ओर से प्रणाम और छोटे भाई को मेरा प्यार कहना।

तुम्हारा मित्र
सुमित

Formal Letter Writing in Hindi


  • औपचारिक पत्र और अनौपचारिक पत्र
    हिंदी में पत्र लेखन यह ध्यान रखें :
    हिंदी में पत्र लेखन अंग्रेजी भाषा की तरह ही होता है, पत्र लिखते समय आप को यह ध्यान रखना है की जो पत्र आप लिख रहे हैं पढ़ने वाले को कितना समझ में आएगा ! क्योंकि जब कोई पत्र पढ़ता है तो आप वहां पर नहीं होते हैं, तो आपका पत्र लेखन ऐसा हो कि आप उसके सामने नहीं होते हुए भी उसको अनुभव दिलाते हैं कि मैं आपके पास हूं और आपसे वार्तालाप कर रहा हूं !

    सरल भाषा का उपयोग हमेशा अच्छा माना जाता है ! लेकिन जटिल शब्दों का प्रयोग व उलझे हुए वाक्य पाठक को निरर्थक एवं उबाऊ बना देते हैं ! निश्चयात्मकता, आपके पत्र में होनी चाहिए यदि पाठक को पत्र पढ़ने के बाद कोई शंका या दुविधा बनी रहती है तो पत्र लिखने का सारा उद्देश्य ही खत्म हो जाता है ! संक्षिप्तता से अपनी पूरी बात लिखना ही अच्छा पत्र लेखन माना जाता है ! पत्र लेखन को दो वर्गो में विभाजित किया जाता है

       1. औपचारिक पत्र
       2. अनौपचारिक पत्र

औपचारिक पत्र
औपचारिक पत्र, हिंदी में पत्र लेखन में ध्यान रखें की जिसको आप पत्र लिख रहे हैं उनसे आपका कोई निजी परिचय नहीं है यदि आपका व्यक्तिगत लगाव या परिचय भी हो तो लेखन में वह व्यक्त नहीं होना चाहिए ! औपचारिक पत्र लेखन में मुख्यतः संदेश, सूचना एवं तथ्यों का ही अधिक महत्व दिया जाता है ! इस प्रकार के पत्र संस्था के अधिकारी एवं कार्यालय के अधिकारी को लिखा जाता है !

अनौपचारिक पत्र
अनौपचारिक पत्र, हिंदी में पत्र लेखन में ध्यान रखें की जिसको आप पत्र लिख रहे हैं उनसे आपका निजी परिचय है और उनसे व्यक्तिगत संबंध भी हैं ! इस तरह के पत्र लेखन में व्यक्तिगत सुख-दुख का ब्योरा एवं विवरण के साथ व्यक्तिगत संबंध को उल्लेख किया जाता है ! अपने परिवार के लोग मित्र एवं निकट संबंधियों को इस तरह के पत्र लिखे जाते हैं !




                                      औपचारिक पत्र

नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखकर उनसे अपने मोहल्ले की सफाई करने का अनुरोध कीजिए।



परीक्षा भवन,
पटना

15 जुलाई 2018

सेवा में,
स्वास्थ्य अधिकारी,
पटना नगर निगम (पटना)

विषय: मोहल्ले की सफाई करवाने हेतु।

महोदय,
बड़े दुख के साथ कहना पड़ता है कि पिछले कुछ दिनों से हमारे मोहल्ले ABC में चारों और कूड़े का घर बना हुआ है ।जहां-तहां सड़कों,गलियों में फेंके गए कूड़े-कचरे के ढेर से पानी नाली में बहने की जगह गली में बिखर जाती है चारों ओर फैली गंदगी के कारण पूरे मोहल्ले में मक्खियों और मच्छरों का साम्राज्य फैला है जिससे तरह तरह की बीमारियों के फैलने का डर बना रहता है। इस विषय पर मैंने उचित अधिकारी को कई बार सूचित किया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
                                अतः आपसे नम्र निवेदन है कि हमारे मोहल्ले में जल्द से जल्द सफाई करवाई जाए जिससे मोहल्ले के लोगों को भयंकर दुर्गंध से राहत मिले इसके लिए हम मोहल्लेवासी आपका हर प्रकार से सहयोग करेंगे।

धन्यवाद सहित,
भवदीय,
XYZ

Kausal vikash Yojna Essay in Hindi


                                                 कौशल विकास योजना

परिचय
भारत के प्रधानमंत्री, श्री नरेंन्द्र मोदी ने 15 जुलाई 2015 को अन्तर्राष्ट्रीय युवा कौशल दिवस पर , नई दिल्ली में “राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन” के रुप में शुरुआत किया।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शब्दों में, “कौशल विकास योजना, केवल जेब में रुपये भरना ऐसा नहीं है, बल्कि गरीबों के जीवन को आत्मविश्वास से भरना है।”इसके अंतर्गत लगभग 40 करोड़ भारतीयों को 2022 तक प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।



उद्श्य
1.गरीबी के कारण जो बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं उनके अन्दर छिपे कौशल को विकसित करना और साथ ही साथ उनके कौशल को सही दिशा में प्रशिक्षित करके गरीबी का उन्मूलन करना है।2.भारत की लगभग 65% जनसंख्या (जिनकी आयु 35 वर्ष से कम है) को वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिये कौशल एंव अवसर प्रदान करना।3.कौशल विकास के साथ उद्यमिता और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना।4.सभी तकनीकी संस्थाओं को विश्व में बदलती तकनीकी के अनुसार गतिशील बनाना।


चुनौतियां
आज जिन हुनर और कौशल के प्रति हम आशान्वित हैं, जरूरी नहीं कि भविष्य में उनकी जरूरत बनी रहे। रोबोटिक्स, इंटरनेट, आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस, ई-कॉमर्स, आदि क्षेत्रों में जो क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहे हैं, वे करोड़ों मौजूदा नौकरियों को निगल जाएंगे।इसके अलावा, औद्योगिक जगत की कार्य-दशा पर भी ध्यान देने की जरूरत है।



सुझाव और निष्कर्ष
सरकार को जिला स्तर पर शिक्षितों  और अशिक्षितो के लिए प्रशिक्षण केंद्र तथा कार्यशाला खोलने का प्रयास करना चाहिए |छात्रों को गुणवता वाली शिक्षा दी जानी  चाहिए ताकि वे अपने विवेक का इस्तेमाल अपने हुनर को निखारने में कर सके |अतः कौशल भारत एक महत्वकांक्षी योजना है जिस पर अमल करने से हमारे युवायों को रोजगार मिलेगा और हमारे देश की तरक्की होगी |

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आरक्षण अच्छा है या बुरा



                                               आरक्षण: अच्छा या बुरा
आरक्षण उस प्रक्रिया का नाम है जिसे भारत की सरकार द्वारा सरकारी संस्थाओं में कुछ पिछड़ी जातियों की सीटें रोक ली जाती है अर्थात उस स्थान पर केवल एक विशेष जाति का व्यक्ति ही काम कर सकता है।


इतिहास
सन् 1902 में कोल्हापुर रियासत के राजा छत्रपति शाहूजी महाराज ने सबसे पहले 50 प्रतिशत आरक्षण दलितों और पिछड़ों को दिया।1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने प्रस्ताव पास किया, जो पूना समझौता कहलाता है, जिसमें दलित वर्ग के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र आवंटित किए गए।1942 में बी आर अम्बेडकर ने अनुसूचित जातियों की उन्नति के समर्थन के लिए अखिल भारतीय दलित वर्ग महासंघ की स्थापना की। उन्होंने सरकारी सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण की मांग की।



फायदे एवं नुकसान
भारतीय समाज में पिछड़े एवं कमजोर वर्ग की उन्नति के लिए आरक्षण दिया गया जिससे उच्च वर्गों द्वारा जो शोषण की किया जाता था वह कम हो सका। सार्वजनिक सेवाओं एवं शिक्षण संस्थाओं में भी आरक्षण के कारण उन्हें ऊपर उठने का मौका मिला। लेकिन आरक्षण का फायदा वैसे लोगों को भी मिल रहा है जो आर्थिक रुप से बहुत ही मजबूत है। आरक्षण के कारण कुछ अयोग्य लोग भी ऊंचे पदों पर चले जाते हैं जिससे देश और समाज को काफी नुकसान होता है।



सुझाव
आरक्षण वास्तव में समाज के उन्हीं लोगों के लिए हितकर हो सकता है जो अपंग है किंतु शिक्षा और गुण होते हुए भी अन्य लोगों से जीवन में पीछे रह जाते हैं उन गरीब लोगों के लिए भी आरक्षण आवश्यक है जो गुणी होते हुए भी गरीबी में जीवन बिता रहे हैं न कि जाति  और धर्म के आधार पर आरक्षण हो।



निष्कर्ष
देश की उन्नति के लिए आवश्यक है की आरक्षण को हटाकर हम सब को एक समान रूप से शिक्षा दें और अपनी उन्नति का अवसर पाने का मौका दें।

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Jan dhan yojna in English

Jan Dhan Yojana Introduction Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana is an ambitious National mission for financial inclusion to ensure access...