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Thursday, July 12, 2018

Kausal vikash Yojna Essay in Hindi


                                                 कौशल विकास योजना

परिचय
भारत के प्रधानमंत्री, श्री नरेंन्द्र मोदी ने 15 जुलाई 2015 को अन्तर्राष्ट्रीय युवा कौशल दिवस पर , नई दिल्ली में “राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन” के रुप में शुरुआत किया।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शब्दों में, “कौशल विकास योजना, केवल जेब में रुपये भरना ऐसा नहीं है, बल्कि गरीबों के जीवन को आत्मविश्वास से भरना है।”इसके अंतर्गत लगभग 40 करोड़ भारतीयों को 2022 तक प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।



उद्श्य
1.गरीबी के कारण जो बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं उनके अन्दर छिपे कौशल को विकसित करना और साथ ही साथ उनके कौशल को सही दिशा में प्रशिक्षित करके गरीबी का उन्मूलन करना है।2.भारत की लगभग 65% जनसंख्या (जिनकी आयु 35 वर्ष से कम है) को वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिये कौशल एंव अवसर प्रदान करना।3.कौशल विकास के साथ उद्यमिता और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना।4.सभी तकनीकी संस्थाओं को विश्व में बदलती तकनीकी के अनुसार गतिशील बनाना।


चुनौतियां
आज जिन हुनर और कौशल के प्रति हम आशान्वित हैं, जरूरी नहीं कि भविष्य में उनकी जरूरत बनी रहे। रोबोटिक्स, इंटरनेट, आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस, ई-कॉमर्स, आदि क्षेत्रों में जो क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहे हैं, वे करोड़ों मौजूदा नौकरियों को निगल जाएंगे।इसके अलावा, औद्योगिक जगत की कार्य-दशा पर भी ध्यान देने की जरूरत है।



सुझाव और निष्कर्ष
सरकार को जिला स्तर पर शिक्षितों  और अशिक्षितो के लिए प्रशिक्षण केंद्र तथा कार्यशाला खोलने का प्रयास करना चाहिए |छात्रों को गुणवता वाली शिक्षा दी जानी  चाहिए ताकि वे अपने विवेक का इस्तेमाल अपने हुनर को निखारने में कर सके |अतः कौशल भारत एक महत्वकांक्षी योजना है जिस पर अमल करने से हमारे युवायों को रोजगार मिलेगा और हमारे देश की तरक्की होगी |

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आरक्षण अच्छा है या बुरा



                                               आरक्षण: अच्छा या बुरा
आरक्षण उस प्रक्रिया का नाम है जिसे भारत की सरकार द्वारा सरकारी संस्थाओं में कुछ पिछड़ी जातियों की सीटें रोक ली जाती है अर्थात उस स्थान पर केवल एक विशेष जाति का व्यक्ति ही काम कर सकता है।


इतिहास
सन् 1902 में कोल्हापुर रियासत के राजा छत्रपति शाहूजी महाराज ने सबसे पहले 50 प्रतिशत आरक्षण दलितों और पिछड़ों को दिया।1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने प्रस्ताव पास किया, जो पूना समझौता कहलाता है, जिसमें दलित वर्ग के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र आवंटित किए गए।1942 में बी आर अम्बेडकर ने अनुसूचित जातियों की उन्नति के समर्थन के लिए अखिल भारतीय दलित वर्ग महासंघ की स्थापना की। उन्होंने सरकारी सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण की मांग की।



फायदे एवं नुकसान
भारतीय समाज में पिछड़े एवं कमजोर वर्ग की उन्नति के लिए आरक्षण दिया गया जिससे उच्च वर्गों द्वारा जो शोषण की किया जाता था वह कम हो सका। सार्वजनिक सेवाओं एवं शिक्षण संस्थाओं में भी आरक्षण के कारण उन्हें ऊपर उठने का मौका मिला। लेकिन आरक्षण का फायदा वैसे लोगों को भी मिल रहा है जो आर्थिक रुप से बहुत ही मजबूत है। आरक्षण के कारण कुछ अयोग्य लोग भी ऊंचे पदों पर चले जाते हैं जिससे देश और समाज को काफी नुकसान होता है।



सुझाव
आरक्षण वास्तव में समाज के उन्हीं लोगों के लिए हितकर हो सकता है जो अपंग है किंतु शिक्षा और गुण होते हुए भी अन्य लोगों से जीवन में पीछे रह जाते हैं उन गरीब लोगों के लिए भी आरक्षण आवश्यक है जो गुणी होते हुए भी गरीबी में जीवन बिता रहे हैं न कि जाति  और धर्म के आधार पर आरक्षण हो।



निष्कर्ष
देश की उन्नति के लिए आवश्यक है की आरक्षण को हटाकर हम सब को एक समान रूप से शिक्षा दें और अपनी उन्नति का अवसर पाने का मौका दें।

Thanku

Saubhagya Yojana Essay in Hindi



                     सौभाग्य योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 25 सितंबर 2017 को , प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना “सौभाग्य योजना” की शुरुआत की ।इस योजना का मुख्य उद्देश्य 2018 के अंत तक देश में सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण हासिल करना है जिसके लिए 16,320 करोड रुपए का राशि आवंटित की गई है।



विशेषता
वैसे लोगों को फ्री में कनेक्शन दिया जाएगा जो 2011 के जनगणना के अनुसार गरीबी रेखा के अंतर्गत आते हैं। जिन लोगों का नाम इस जनगणना में सामिल नहीं है उन लोगों को भी₹500 का भुगतान कर बिजली का कनेक्शन ले सकेंगे । जहां लाइट की सुविधा नहीं है वहां सोलर पैनल के साथ 5 LED बल्ब , और एक डीसी पंखा दिया जाएगा और अगले 5 सालों तक मरम्मत का सारा खर्चा सरकार उठाएगी। यह योजना के तहत बिहार उत्तर प्रदेश झारखंड उड़ीसा जम्मू कश्मीर राजस्थान एवं पूर्वोत्तर राज्य शामिल है।


फायदें
देश के सभी घरों में बिजली पहुंचने से शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार होगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, शिक्षा व्यवस्था बेहतर होगी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ना केवल लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि महिलाओं के दैनिक कार्यों में भी सुधार होगा।

चुनौतियां
सौभाग्य योजना की राह में सबसे बड़ी अड़चन उत्तर प्रदेश और बिहार हैं। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित 71% और बिहार के 85% घरों में अभी भी बिजली नहीं पहुंच पायी है। वर्तमान में  डिस्कॉम पर एक हजार करोड़ रुपये का भारी कर्ज का बोझ है, इसके लिए 2018 के अंत तक सौभाग्य को लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी।



सुझाव और निष्कर्ष
इसके सफल कार्यान्वयन के लिए ऊर्जा क्षेत्र में निचले अधिकारियों की भ्रष्टाचार और उदासीनता को कम किया जाना चाहिए।इसका सफल कार्यान्वयन स्मार्ट गांवों के निर्माण, ऊर्जा सुरक्षा को प्राप्त करने और दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण है।

Thanku

Make in India Essay in Hindi



           ‘मेक इन इंडिया


‘मेक इन इंडिया भारत सरकार द्वारा देशी और विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में ही वस्तुओं के निर्माण पर बल देने के लिए बनाया गया है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 सितम्बर 2014 को किया था।

यह वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आता है।


मेक इन इंडिया के मुख्य उद्देश्य:
  1. मध्यावधी की तुलना मैं विनिर्माण क्षेत्र में 12% से 14% प्रतिवर्ष वृद्धि करने का लक्ष्य।
  2. देश के सकल घरेलू उत्पाद मे विनिर्माण की हिस्सेदारी 2022 तक बढ़ाकर 16% से 25% करना
  3. विनिर्माण के क्षेत्र में 2022 तक 100 मिलियन अतिरिक्त रोजगार सृजन करना।
  4. ग्रामीण प्रवासियों एवं शहरी गरीब लोगों में समग्र विकास के लिए समुचित कौशल का निर्माण करना।
  5. घरेलू मूल्य संवर्धन और विनिर्माण में तकनीकी ज्ञान में वृद्धि करना ।



फायदे
ज्यादा से ज्यादा भारत में समान बनेंगे, उच्च गुणवत्ता वाले सामान सस्ते दामों में मिलेंग, देश में रोजगार बढ़ेगा जिससे गरीबी कम होगी। दूसरे देश के निवेशक हमारे यहां पैसा लगाएंगे जिससे अर्थव्यवस्था में मजबूती आएगी।



चुनौतियां
मेक इन इंडिया के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा भारत में रेल-सड़क यातायात और अपर्याप्त बंदरगाह है। निवेश के रास्ते में एक बड़ी समस्या राज्यों और केंद्र की नीतियों की जटिलता है। पुराने और नए निवेशकों का विश्वास कमाना मोदी सरकार के लिए आसान नहीं होगा।


सुझाव और निष्कर्ष
'मेक इन इंडिया' तभी सफल होगा जब हमारा श्रम बल बाकी दुनिया के मुकाबले प्रतिस्पर्धी होगा। सरकार को पारदर्शी और सरकारी नीतियों के साथ उद्योग को बेहतर वातावरण भी प्रदान करना होगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था की गति को बनाए रखने एवं युवा ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए मेक इन इंडिया इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

Thanku

Khelo india essay in Hindi



     खेलो इंडिया

देश में खेल एवं खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए तथा खेलों के स्तर को ऊपर उठाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 31 जनवरी, 2018 को इसकी शुरुआत की, जो 5 साल के लिए 2018-2022 के अंतर्गत दिल्ली में कई स्थानों पर आयोजित किये जाएंगे। इस कार्यक्रम का एक लक्ष्य यह भी है कि स्वस्थ जीवन शैली के साथ गतिशील जनसंख्या का निर्माण किया जा सके।


                       खेल के विकास के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम को भारत के युवा मामलों और खेल मंत्रालय ने खेलो इंडिया को लॉन्च किया। जो राजीव गाँधी खेल अभियान को खेलो इण्डिया के साथ विलय कर एक प्रोग्राम बनाया गया । इन खेलो में 10-18 वर्ष के(लड़कों और लड़कियों) के लिए 16 प्रकार के खेलों को शामिल किया गया है।


                          खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत 10 से 18 साल तक के करीब 20 करोड़ बच्चों को राष्ट्रीय शारीरिक फिटनेस अभियान में शामिल किया जाएगा। खेल मंत्रालय ने खेलो इंडिया के तहत हर साल 1000 प्रतिभावान खिलाड़ियों का चयन करने का फैसला किया है जिनमें से प्रत्येक को 8 साल तक 5-5 लाख रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान कराई जाएगी, जिससे प्रतिस्पर्धी खिलाड़ियों की श्रृंखला का निर्माण होगा जो विश्व स्तर पर जीत हासिल करने के लिए मुकाबला करेंगे।



                     खेलो इंडिया की सफलता के लिए आवश्यक है कि लोगों को इसके प्रति जागरुक किया जाए तथा धरातल पर इसके क्रियांवयन को सुनिश्चित किया जाए। इस प्रकार खेलो इंडिया अभियान के जरिए से देश के पिछड़े तथा आर्थिक रुप से कमजोर युवाओं को भी अपना कौशल दिखाने का एक सुनहरा मौका मिलेगा तथा आने वाले दिनों में विश्वस्तरीय खिलाड़ी होंगे, जिससे दुनिया में हमारा नाम होगा।
                          

Thanku

Digital India Essay in Hindi

                       
                            डिजिटल इंडिया


भूमिका
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 1 जुलाई, 2015 को डिजिटल इंडिया पहल की शुरुवात की जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना कागज के इस्तेमाल के सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनता तक पहुंच सके। इसके लिए 113 हजार करोड़ रूपये के अनुमानित बजट की व्यवस्था है जिसे 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आता है।




लाभ
इस अभियान के तहत शिक्षा ,अस्पताल समेत सभी सरकारी दफ्तरों को गांव से देश की राजधानी तक जोड़ा जाएगा जिससे उन्हें घर बैठे ही सारी जानकारियों का लाभ मिलेगा। किसी भी स्थान से अपने दस्तावेज और प्रमाणपत्र को ऑनलाइन जमा करना लोगों के लिए संभव बनाएगा जो शारीरिक काम को घटाएगा। ई-हस्ताक्षर संरचना के द्वारा नागरिक अपने दस्तावेजों को ऑनलाइन हस्ताक्षरित करा सकेंगे। डिजिटल लॉकर व्यवस्था लागू करने को यह मुमकिन बनाएगा। देश के लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतों ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध होगी जिसकी सहायता से लोग ऑनलाइन की सुविधाओं का उपयोग करना सीखेंगे।इससे प्रत्यक्ष रूप से 1.7 करोड़ लोगों को और अप्रत्यक्ष रूप से 8.5 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा |



चुनौतियाँ
डिजिटल भारत होने से आम व्यक्ति की जिंदगी आसान तो होगी, लेकिन इसमें कुछ चुनौतियां भी सामने आएगी जैसे-इंटरनेट की धीमी स्पीड,देश की कम्प्यूटर तथा सूचना प्रणाली इंटरनेट से जुड़ी हुई है इसे सुरक्षा का खतरा भी बना रहेगा,बिजली की परेशानी, प्रशिक्षण का अभाव मुख्य रूप से शामिल है।



सुझाव और निष्कर्ष
डिजिटल इंडिया का सपना तभी पूरा हो सकेगा जब इन चुनौतियों को गंभीरता से लिया जाएगा। किसी भी दूसरे देश से ज्यादा वृद्धि और अच्छे भविष्य के लिये भारत में डिजिटलीकरण की बहुत जरुरत थी।

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Plastic pollution Essay in Hindi


    EKLAVYA CAMPUS

             Plastic Pollution

परिचय

प्लास्टिक यह एक ऐसा पदार्थ है जो हजारों सालों तक ज्यों का त्यों पड़ा रहता है अन्य पदार्थों की तरह हैं यह‌ विघटित नहीं होता है। मानव ने प्लास्टिक का निर्माण अपनी सुविधा के लिए किया था
लेकिन अब यही प्लास्टिक मानव के जीवन के साथ-साथ पृथ्वी के वातावरण के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।


विस्तृत भाग

दुनिया भर में 10 लाख प्लास्टिक की बोतलें प्रति मिनट खरीदी जाती हैं और 500 अरब प्लास्टिक बैगों का उपयोग किया जाता है। कुल मिलाकर, हमारे द्वारा प्रयोग किए जाने वाले प्लास्टिक में से 50% प्लास्टिक का सिर्फ एक बार उपयोग होता है। प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे विश्व में इतना प्लास्टिक हो गया है कि इस प्लास्टिक से पृथ्वी को 5 बार लपेटा जा सकता है ।


हानि

प्लास्टिक का पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव जंतुओं पर दुष्प्रभाव पड़ता है-प्लास्टिक ऐसे पदार्थों को मिलाकर बनाया जाता है जो कि हजारों सालों तक नष्ट नहीं होता है जिससे जल प्रदूषण ,वायु प्रदूषण एवं मृदा प्रदूषण होता है। एक शोध के मुताबिक प्लास्टिक से कैंसर जैसी बीमारियां भी हो सकती है। पृथ्वी का सबसे ज्यादा प्लास्टिक से बनी हुई वस्तुएं महासागरों में ही पाई जाती है जिसके कारण जलीय जीव की मृत्यु हो जाती है।


उपाय

प्लास्टिक से बनी हुई ऐसी वस्तुओं के इस्तेमाल से बचें जिन्हें एक बार इस्तेमाल में लिए जाने के बाद  फेंकना पड़े। जब भी आप कोई वस्तु खरीदने जाए तो फिर से कपड़े का थैला अपने साथ लेकर जाएं। लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभाव के प्रति जागृत करें। कभी भी प्लास्टिक को स्वयं नष्ट न करें इससे अच्छा होगा कि हम इसकी रिसाइकल का हल ढूंढें।


निष्कर्ष

यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि हम पॉलीथीन या प्लास्टिक के युग में रह रहे हैं। अगर हम भविष्य में प्लास्टिक से छुटकारा चाहते हैं‌ तो सरकार को इसके प्रति एक कड़ा कानून बनाने के साथ लोगों को भी इसके प्रति जागरुक करने होंगे तभी हम एक स्वस्थ पर्यावरण का निर्माण कर सकेंगे।


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Sukanya Samriddhi Yojana Essay in Hindi


                   सुकन्‍या समृद्धि योजना




परिचय
सुकन्‍या समृद्धि भारत की एक छोटी बचत योजना है,जिसकी शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को किये। जिसके अंतर्गत माता-पिता या कानूनी अभिभावक कन्या के नाम से खाता खोल सकते हैं और उसका संचालन कन्या के 10 वर्ष की आयु होने तक कर सकते हैं। यह खाता किसी भी डाकखाने और निर्धारित सरकारी बैंकों में खोला जा सकता है।इस खाते में जमा कराने की न्यूनतम राशि 1000 है।





सुकन्या समृद्धि योजना क्यों शुरू की गई?
लड़कियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत की। जो बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान का हिस्सा है। लड़कियों को कई प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जहां जन्म से पहले गर्भ में शिशु को मार दिया जाता है वही जन्म के बाद लड़कों और लड़कियों में भेदभाव किया जाता है।




लाभ
|सुकन्या समृद्धि खाता योजना के अंतर्गत उनको 9.2 प्रतिशत ब्याज दर मिलेगी जो उनके जमा कराए गए पैसे को बढ़ाने में मदद करेगी।सुकन्या समृद्धि खाता योजना के अंतर्गत जब कन्या 18 वर्ष की हो जाएगी ,तब मैं पढ़ाई के लिए अपने पैसे निकलवा सकती है और 21 वर्ष का होने पर विवाह के लिए भी उन पैसों का उपयोग कर सकती है|




चुनौतियां
गरीबी रेखा से नीचे कम से कम 10 करोड़ लोग हैं। बीपीएल श्रेणी के सभी परिवार कैसे खाता खोल पायेंगे और कैसे उसे चलाने में सक्षम हो पाएंगे? इसके अलावा बहुत गरीब और अशिक्षित लोगों को अपनी लड़कियों के लिए ऐसी बचत योजनाओं को समझने में मुश्किल हो सकती है।




निष्कर्ष
सुकन्‍या समृद्धि योजना से लड़कियों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा वह आगे बढ़ेंगी ।यदि हमारे देश की लड़कियां आगे बढ़ेंगी तभी हमारे देश की तरक्की होगी।

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Chashless india essay in Hindi

                    


 नकदी रहित भारत (कैशलेस इंडिया)




परिचय
कैशलेस लेन-देन का मतलब ऐसे सौदों से होता है जहाँ पर किसी वस्तु या सेवा को खरीदने के लिए भुगतान “कैश” के रूप में न करके ऑनलाइन तरीकों जैसे मोबाइल बैंकिंग, इन्टरनेट बैंकिंग,चेक, ड्राफ्ट या किसी अन्य तरीके से जैसे मोबाइल वॉलेट ,Paytm इत्यादि से होता है|




उद्श्य
नोटबंदी के बाद सरकार चाहती थी कि लोग कैशलेस लेन-देन को अपनाएं ताकि कालेधन और नकली नोटों पर रोक लगे। इसलिए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कैशलेस इंडिया की शुरुआत 2 जुलाई 2015 को की। जिसको ग्रामीण क्षेत्रों को उच्च गति वाले इंटरनेट नेटवर्क से जुड़ने और डिजिटल साक्षरता में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।



फायदे
कैशलेस होने के फ़ायदे हैं-टैक्स चोरी करना मुश्किल होगा, जाली नोटों की समस्या से निजात मिलेगा, आतंकवाद और अपराध की फंडिंग कठीन होगी, ई-कॉमर्स को बढ़ावा मिलेगा।चूंकि इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में हर लेनदेन पारदर्शी होगा इस कारण सरकार की कर आय में भी बढ़ोत्तरी होगी, जिसको वह लोगों के कल्याण पर खर्च कर सकेगी|



चुनौतियां
इससे जुड़ी कुछ परेशानियां भी हैं-कैशलेस भुक्तान के लिए सबसे बड़ी समस्या तकनीक की उपलब्धता तथा लोगों में जागरूकता हैं,इंटरनेट की धीमी गति, साइबर सुरक्षा और ताकतवर बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं की मनमानी का डर कैशलेस इंडिया के राह में बाधा बन सकता है।




सुझाव और निष्कर्ष
अगर आम लोग इस तकनीक का इस्तेमाल कर पाएंगे तब ही यह योजना सफल हो सकती है।  इसके लिए साक्षरता के अभियान के साथ - साथ तकनिकी साक्षरता पर बल देना पड़ेगा।  पढ़े - लिखे युवाओं का यह कर्तव्य बनता है कि वे आम आदमी को नवीनतम तकनीक जो कैशलेस से संबंधित है के बारे में जानकारी दे एंव प्रशिक्षित करें।  अगर कैशलेस लेन - देन भारत में सफल हो जाता है तो यह एक चमत्कार होगा और भारत अतिशीघ्र आर्थिक महासक्ति बन जायेगा।

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तीन तलाक


                                                     तीन तलाक


परिचय
भारत में तीन तलाक वह कुप्रथा है जिसमें कोई मुसलमान पुरुष अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोलकर ,लिखकर या किसी भी e-संदेश द्वारा भेजकर उससे तलाक कर लेता है।तलाक का यह जरिया मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से कानूनी है लेकिन मुसलमान के पवित्र ग्रंथ कुरान में इसका कोई जिक्र नहीं है।





तीन तलाक के वजह से मुस्लिम महिलाओं को डर- डर के रहना पड़ता है, क्योंकि यह तीन शब्द उनकी जिंदगी बर्बाद कर सकते हैं | यह मानवीय हकों का उल्लंघन है, भारतीय कानून के हिसाब से स्त्री और पुरुष को दोनों को समान हक्क होते हैं पर तीन तलाक के मामले में महिलाओं पर यह एक प्रकार से अन्याय होता है| चूंकि ज्यादातर मुस्लिम महिलाएँ अपने शौहर पर निर्भर होती है| अतः तलाक के बाद मुस्लिम महिलाएँ के सामने अचानक से बच्चो की जिम्मेदारी, आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।





दुनिया के 22 ऐसे देश हैं जहां तीन तलाक पूरी तरह बैन है। अच्छी बात यह है कि इस सूची में पाकिस्तान, बांग्लादेश, सीरिया सहित कई मुस्लिम देश भी हैं।मिस्र दुनिया का पहला ऐसा देश है जहां तीन तलाक को पहली बार बैन किया गया था। 1947 में भारत और पाकिस्तान एक साथ अलग हुए लेकिन, तीन तलाक को बैन करने में हमारा पड़ोसी हमसे कई कदम आगे है।





सर्वोच्य न्यायालय ने तत्काल इस पर रोक लगा दी और संसद को सुझाव दिया गया की इस पर ठोस कानून बनाया जाए | केंद्र सरकार ने कानून का प्रारूप तैयार किया | जिसके तहत तीन साल की सजा और गुजारा भता को शामिल किया गया | लोकसभा ने इस विधेयक को पारित कर दिया है लेकिन राज्यसभा में इसे विचाराधीन रखा गया है |




निष्कर्ष
यह कोई धार्मिक मामला नहीं है बल्कि सती प्रथा, दहेज़ प्रथा तथा बाल विवाह जैसी कुप्रथा है। अतः हमें सरकार का समर्थन करना चाहिए तभी सबका साथ सबका विकास संभव हो पाएगा।

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लोकतंत्र में मीडिया का महत्व


                    लोकतंत्र में मीडिया का महत्व



परिचय
मीडिया यानि मीडियम या माध्यम। मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है. हालांकि वह लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का अंग नहीं है, लेकिन उसका महत्व इसलिए है कि वह उसके तीनों स्तंभों, विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका, के कामकाज पर नजर रखता है।


महत्व
आधुनिक युग में मीडिया का सामान्य अर्थ समाचार-पत्र, पत्रिकाओं, टेलीविज़न, रेडियो, इंटरनेट आदि से लिया जाता है। मीडिया का जन-जागरण में बहुत योगदान है जैसे-बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का अभियान, एड्स के प्रति जागरुकता फैलाने का कार्य, लोगों को वोट डालने के लिये प्रेरित करना,बाल मज़दूरी पर रोक लगाने के लिये प्रयास करना,धूम्रपान के खतरों से अवगत कराना आदि अनेक कार्यों में मीडिया की भूमिका सराहनीय है।देश में भ्रष्टचारियों पर कड़ी नज़र रखता है।समय-समय पर स्टिंग ऑपरेशन कर इन सफेदपोशों का काला चेहरा दुनिया के सामने लाता है। इस प्रकार मीडिया हमारे लिये एक वरदान की तरह है।


दोष
भारत में मीडिया की स्वतंत्रता पर अंकुश बढ़ता जा रहा है। मीडिया पर प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप लगाम कसना लगभग सभी सरकारों का प्रयास रहता है एवं मीडिया भी पैसा कमाने के लालच में समाज को गुमराह कर रहा है। आज हमारे समाचार पत्र अपराध की खबरों से भरे रहते हैं। जबकि सकारात्मक समाचारों को स्थान ही नहीं मिलता । यदि मिलता भी है तो बीच के पन्नों पर कहीं किसी छोटे से कोने में।


निष्कर्ष
मीडिया अपराध की खबरों को दिखाए पर सकारात्मक समाचारों से भी किनारा न करे। समाज में फैली बुराइयों के अलावा विकास को भी दिखाए ताकि आम आदमी निराशा में डूबा न रहे कि इस देश का कुछ नहीं हो सकता। अत: किसी भी देश व समाज के निर्माण में मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

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Education System Essay in Hindi


   EKLAVYA CAMPUS

परिचय

किसी भी राष्ट्र अथवा समाज में शिक्षा सामाजिक नियंत्रण, व्यक्तित्व निर्माण तथा सामाजिक व आर्थिक प्रगति का मापदंड होती है । भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली ब्रिटिश प्रतिरूप पर आधारित है जिसे सन् 1835 ई॰ में लागू किया गया ।



विस्तृत भाग

सन् 1835 ई॰ में जब वर्तमान शिक्षा प्रणाली की नींव रखी गई थी तब लार्ड मैकाले ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि अंग्रेजी शिक्षा का उद्‌देश्य सरकारी कार्य के लिए भारत के विशिष्ट लोगों को तैयार करना है । लगभग पिछले दो सौ वर्षों की भारतीय शिक्षा प्रणाली के विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि यह शिक्षा उच्च वर्ग केंद्रित, श्रम तथा बौद्‌धिक कार्यों से रहित थी । इस आधुनिक शिक्षा की बुराई महात्मा गांधी ने भी की थी।



दोष

आज विद्यार्थी को इतनी अधिक पुस्तकें पढ़नी पड़ती है कि उन्हें पढ़ने और पढ़कर परीक्षा पास करने के सिवाय कुछ और सोच ही नहीं सकता ।बड़ा होने पर उसे अवश्य ही कोई अच्छी नौकरी मिल जायेगी। जब अच्छी नौकरी पाना ही सब प्रकार से जीवन का उद्देश्य हो जाय तो मानसिक विकास का प्रश्न ही कहाँ रहा? ऐसा व्यक्ति समाज के कल्याण की ओर क्या ध्यान दे सकता है?



निवारण

अंग्रेजों से विरासत में मिली हुई वर्तमान शिक्षा में सुधार की आवश्यकता है इसके लिए हमे पाठ्यक्रम में व्यावहारिक जीवन संबन्धी जानकारियों को स्थान देना होगा, पुस्तकों का बहुत भारी बोझ कम करने के साथ-साथ परीक्षा में अंकों की महत्ता को भी समाप्त करने की जरूरत है, बालकों का सामान्य ज्ञान बढ़ाने के अधिक साधन उपस्थित किये जाऐं, शिक्षा शुल्क, इतना कम हो कि उसे साधारण श्रेणी के लोग भी आसानी से उठा सकें एवं समय-समय पर शिक्षकों की योग्यता, सक्रियता और पढ़ाने के कौशल का भी जांच किया जाए।



निष्कर्ष

हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली गैर-तकनीकी छात्र-छात्राओं की एक ऐसी फौज तैयार कर रही है जो अपने परिवार व समाज पर बोझ बन कर रह जाती है । अत: शिक्षा को राष्ट्र निर्माण व चरित्र निर्माण से जोड़ने की नितांत आवश्यकता है ।


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Right to privacy Essay in Hindi


   EKLAVYA CAMPUS

परिचय

“निजता का अधिकार” किसी व्यक्ति की स्वायत्तता और गरिमा की रक्षा के लिए जरूरी है एवं यह कई अन्य महत्वपूर्ण अधिकारों की आधारशिला है। दरअसल, निजता का अधिकार हमारे लिए एक आवरण की तरह है जो हमारे जीवन में होने वाले अनावश्यक और अनुचित हस्तक्षेप से हमें बचाता है ।  


विस्तृत भाग

भारत में नागरिकों की निजता के अधिकार पर छिड़ी बहस में  24 अगस्त,2017 को सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से “निजता के अधिकार” को संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मौलिक अधिकार माना है । जबकि खड़ग सिंह मामले में शीर्ष अदालत की छह सदस्यीय पीठ ने 1954 में तथा एमपी शर्मा मामले में आठ-सदस्यीय पीठ ने 1962 में व्यवस्था दी थी कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकारों की श्रेणी में नहीं आता है।


तर्क

आज हम सभी स्मार्टफोन का प्रयोग करते जब हम कोई भी ऐप डाउनलोड करते तो यह हमारे फोन के कांटेक्ट ,गैलरी ,जगह आदि के प्रयोग की इजाजत मांगता है और इसके बाद ही वह ऐप डाउनलोड किया जा सकता है ऐसे में खतरा है कि यदि किसी गैर-अधिकृत व्यक्ति ने उस ऐप के डेटाबेस में सेंघ लगा दी तो उपयोगकर्ताओं की निजता खतरे में पड़ सकती है। इसी अधिकार में आधार का मामला विवादस्पद बना रहा। इस फैसले के बाद सरकार आपकी निजी जानकारी जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या क्रेडिट कार्ड की जानकारी को सार्वजनिक नहीं कर सकती है।



निष्कर्ष

भारत विकासशील देश है जहां कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए सरकार को सक्रिय भूमिका निभानी पड़ती है वहां निजता के अधिकार के मूल अधिकार बन जाने के बाद सरकार पर इस जानकारी का सही तरह रख-रखाव करने की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। अतः सरकार को चाहिए कि एक ऐसा कानून बनाएं जैसे हमारे नेता सुरक्षित रहे सरकार की कल्याणकारी योजनाएं भी चलती रहे।


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One Nation, one election Essay in Hindi


         EKLAVYA CAMPUS

परिचय

देश में लोकसभा चुनावों के बाद सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव और उपचुनावो कों मिलाकर कई चुनाव होते हैं। ऐसे में इन चुनावों का खर्चा, व्यवस्था और देखरेख के लिए चुनाव आयोग के ऊपर पड़ने वाले भार कम करने के लिए  वन नेशन, वन इलेक्शन के मुद्दे पर सरकार द्वारा विचार किया जा रहा है। जो पूरे देश में हर पांच साल में एक ही बार में एक चुनाव कराया जाएगा।


विस्तृत भाग

हाल ही में कानून दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा तथा तथा राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ संपन्न कराने के बात कही है जिस पर नीति आयोग ने कहा है कि वर्ष 2024 में लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनाव एक साथ कराना राष्ट्रहित में होगा।ये पहली बार नहीं है इससे पहले भी वन नेशन-वन इलेक्शन का विचार चर्चा में रहा है।इलेक्शन कमीशन ने पहली बार साल 1983 में इसे लेकर सुझाव दिया था।



लाभ

अगर ऐसा होता है तो इससे बहुत फायदा होगा-आयोग को बार-बार चुनाव की तैयारी से छुटकारा मिलेगा,चुनावी खर्चों में कमी आएगी(नीति आयोग के मुताबिक, साल 2009 में हुए लोकसभा चुनाव पर करीब 1,115 करोड़ रुपये का खर्च आया था।जबकि साल 2014 के लोकसभा चुनाव पर करीब 3870 करोड़ रुपये खर्च हुए),सुरक्षा संसाधनों/शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए पुलिसकर्मियों के इस्तेमाल में कमी आएगी,भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगा एवं सरकारी प्रक्रिया बाधित होने के अवसर कम हो जाएंगें।



नुकसान

इस व्यवस्था से बहुत फायदा भी है तो इससे कुछ नुकसान भी हैं-जनता के प्रति जवाबदेही का कम होना, क्षेत्रीय एजेंडे पर राष्ट्रीय एजेंडे का दबदबा, क्षेत्रीय पार्टियों के लिए संकट, चुनाव के व्यक्तिकेंद्रित होने की आशंका,स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने का पेंच आदि शामिल है।



निष्कर्ष

एक देश, एक चुनाव एक उत्तम विचार है फिर भी यदि संविधान संशोधन के माध्यम से यह विचार लाया जाता है तो यह ध्यान रखना होगा कि संघवाद के मूल्य संरक्षित रहे और देश की विविधता अक्षुण्ण बनी रहे।



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Bharatmala Project Essay in Hindi



                भारतमाला परियोजना




परिचय
भारतमाला परियोजना एक राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना हैं ,जसकी सुरूआत भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 31 जुलाई 2015 को किया, इसके तहत नए राजमार्ग के अलावा उन परियोजनाओं को भी पूरा किया जाएगा जो अब तक अधूरे हैं। इसमें सीमा और अंतर्राष्‍ट्रीय संयोजकता वाले विकास परियोजना को शामिल किया गया है। जो सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं जिसके प्रमुख नितिन गडकरी जी हैं।



उद्देश्य
इस परियोजना का उद्देश्य बंदरगाहों और सड़क, राष्ट्रीय गलियारों (नेशनल कॉरिडोर्स) को ज्यादा बेहतर बनाना और राष्ट्रीय गलियारों को विकसित करना इसके अलावा पिछडे इलाकों, धार्मिक और पर्यटक स्थल को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए जाएंगे। चार धाम केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री के बीच संयोजकता बेहतर की जाएगी। भारतमाला परियोजना के तहत राजमार्ग की कुल लंबाई 51,000 किलोमीटर होगी जिसपर 5.35 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा।
भारतमाल पारियोजन के पहले चरण के तहत नई सड़क की कुल लंबाई 34,800 किलोमीटर होगी जिसे 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।



लाभ
इससे लगभग संपूर्ण भारत में एक बहुत ही सुंदर सड़क नेटवर्क का खाका तैयार हो पाएगा एवं शहरों और कस्बों में इंटर कनेक्टिविटी बेहद सुगम हो पाएगी।वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्गों पर माल ढुलाई वाहनों का औसत गति 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की है। लेकिन भारतमाला परियोजना की संपन्न होने पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर इन वाहनों की औसत गति 75 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक होने की उम्मीद है।




निष्कर्ष
भारत में परिवहन परिदृश्य बहुत तेजी से बदल रहा और देश के विकास में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी में है इस काम में भारतमाला सड़क परियोजना बहुत महत्वपूर्ण योगदान देगी।



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Population Growth: A Big Problem Essay in Hindi


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परिचय

हमारी सामूहिक भौतिक समस्याओं में सबसे बड़ी समस्या जनसंख्या वृद्धि की है। भारत की भूमि और वर्तमान अर्थव्यवस्था जितने लोगों का भार वहन कर सकती है उसकी अपेक्षा आबादी कहीं अधिक होने से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में संतुलन बिगड़ता है और उसका प्रभाव प्रत्येक नागरिक पर बुरा ही पड़ता है।



मुख्य भाग

पूरे दुनिया में मनुष्य की जनसंख्या हर साल लगभग 8.3 करोड़ या 1.1% की दर से बढ़ती जा रही है। वर्ष 1800 को पूरे विश्व की जनसंख्या लगभग एक अरब थी, जो 2017 तक बढ़ कर 7.6 अरब हो गई है। 2100 तक इसकी आबादी 11.2 अरब तक हो सकती है। संपूर्ण विश्व में चीन के पश्चात् भारत सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है । 2011 के जनगणना के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या 1.2 अरब रहा है जो पूरे विश्व का 17.5% है।



कारण

भारत में जनसंख्या वृद्धि के कई कारण हो सकते हैं, इनमें- उच्च जन्म-दर एवं घटती हुर्इ मृत्यु-दर, अवैध प्रवास, बढ़ता जीवन प्रत्याशा, विवाह व सन्तानोत्पत्ति की भावना, अशिक्षा एवं अज्ञानता, बाल विवाह, अंधविश्वास,
लडके की चाह मे लडकियाँ पैदा करना प्रमुख हैं।



प्रभाव

आजादी के 70 साल के बाद भी बढ़ती आबादी के कारण देश का परिदृश्य कुछ खास अच्छा नहीं है। भारत जैसे देश में इतनी ज्यादा आबादी के लिए रोजगार पैदा करना बहुत मुश्किल है जिससे बेरोजगारों की संख्या मैं वृद्धि हुई है, आर्थिक मंदी, व्यापार विकास और विस्तार गतिविधियां धीमी होती जा रहीं हैं। भूमि क्षेत्र, जल संसाधन और जंगल सभी का बहुत शोषण हुआ है। महंगाई आबादी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है।



निष्कर्ष

सरकार द्वारा शुरू की गई परिवार नियोजन योजनाओं के लाभों को कई मायनों में जोर दिया जाना चाहिए। सरकार द्वारा जन जागरुकता बढ़ाने और जनसंख्या नियंत्रण के कड़े मानदंड बनाने से देश की आबादी पर नियंत्रण पाया जा सकता है और इससे देश की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।



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ISRO ACHIEVEMENT Essay in Hindi


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परिचय

भारत का गौरव जिसकी कामयाबी के आगे दुनिया सिर झुकाती है। जिस पर हर भारतीय को गर्व है उसका नाम है “इसरो” यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन। जिसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 को डॉ विक्रम साराभाई के नेतृत्व में किया गया था इसका मुख्यालय बंगलुरु, कर्नाटक में है तथा इसके भारत देश में कुल 21 शहरो में स्पेस सेंटर है। इसरो का प्रमुख उद्देश्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का विकास तथा विभिन्न राष्ट्रीय आवश्यकताओं में उनका उपयोग करना है।



विस्तृत भाग

सन 1979 तक इसरो अपने खुद के पूर्ण स्वदेशी सैटेलाइट बनाने में तो कामयाबी हासिल कर चुका था पर उसे अभी भी अंतरिक्ष में सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए दूसरे देशों की सहायता लेनी पड़ती थी लेकिन 1980 में रोहिणी उपग्रह पहला भारतीय-निर्मित प्रक्षेपण यान SLV -3 बनाकर इसे स्पेस में भी सफलता के साथ लॉन्च कर दिया। आपको यह जानकर गौरव होगा की अमेरिका, जापान, रूस, चीन, फ्रांस के साथ भारत विश्व के उन देशों में शामिल है जो अपने देश में सैटेलाइट बनाने के साथ उसे अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता रखता है।




उपलब्धि

इसके कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर नजर डालते हैं ।आर्यभट्ट इसरो का पहला उपग्रह था जो की 19 अप्रैल 1975 लॉन्च किया गया था। सन 22 अप्रैल 2008 को चंद्रयान -1 लॉन्च किया । भारत विश्व में एकलौता ऐसा देश है जिनसे पहली ही बार में मंगलयान के माध्यम से मंगल ग्रह पर पहुंचने में सफलता प्राप्त किया।इसरो ने 15 फ़रवरी 2017 को PSLV-C37 द्वारा एक साथ 104 सैटेलाइट्स पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करके सबसे अधिक सैटेलाइट्स लांच करने का भी वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।



निष्कर्ष

हम वास्तव में भाग्यशाली हैं कि हमारा अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, इसरो हमे अंतरिक्ष में झांकने का मौका देता है जिससे हम वहां हो रही गतिविधियों की जानकारी व रहस्मयी घटनाओं की खोज की सही जानकारी प्राप्त कर सकते है।



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Jan dhan yojna in English

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